Mangalwar Hanuman Puja
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें
॥ जय बजरंगबली ॥
मंगलवार हनुमान जी का दिन है. हमारे घरों में इस दिन सुबह या शाम दीया जलता है, हनुमान चालीसा और संकटमोचन हनुमान अष्टक का पाठ होता है, और बहुत लोग मंगलवार का व्रत रखते हैं. यहाँ घर पर पूजा की आसान विधि, चोला चढ़ाने का तरीका, मंगलवार व्रत कथा और नियम एक जगह हैं.

घर पर मंगलवार पूजा की विधि
लगभग 20 से 25 मिनट. जितना हो सके उतना करें, भाव सबसे ज़रूरी है.
- स्नान और तैयारी: नहाकर साफ़ कपड़े पहनें. लाल या केसरिया हो तो अच्छा. पूजा की जगह साफ़ करें और हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति लाल कपड़े पर रखें. साथ में राम दरबार की तस्वीर हो तो और अच्छा.
- दीया: घी या चमेली के तेल का दीया और अगरबत्ती जलाएँ.
- चढ़ावा: सिंदूर (चमेली के तेल में मिलाकर), लाल फूल, तुलसी दल, और भोग में बूंदी, बेसन के लड्डू या गुड़-चना.
- पाठ: पहले राम जी का नाम, फिर हनुमान चालीसा, फिर संकटमोचन हनुमान अष्टक, फिर बजरंग बाण. समय हो तो सुंदरकांड.
- आरती: आरती कीजै हनुमान लला की गाएँ, भोग बाँटें और जय श्री राम बोलें.
मंगलवार को हनुमान जी को क्या चढ़ाएँ
| क्या | कैसे | किस भाव से |
|---|---|---|
| सिंदूर और चमेली का तेल | दोनों मिलाकर तिलक या चोला | सीता जी की माँग के सिंदूर की कथा से जुड़ा, सबसे प्रिय चढ़ावा |
| लाल फूल | गुड़हल या गुलाब, माला या फूल | लाल रंग हनुमान जी को प्रिय है |
| बूंदी, बेसन के लड्डू | भोग लगाकर प्रसाद बाँटें | मंदिरों का सबसे आम प्रसाद |
| गुड़ और भुने चने | एक मुट्ठी, भोग में | सादा और घर का भोग |
| पान का बीड़ा | बिना कत्था-चूना, लौंग-इलायची के साथ | मान्यता है कि यह बहुत प्रिय है |
| तुलसी | भोग पर एक पत्ता | राम भक्त को राम जी की प्रिय तुलसी |
हनुमान जी को चोला कैसे चढ़ाएँ
चोला यानी सिंदूर और चमेली के तेल का लेप. मंदिर की बड़ी मूर्ति पर चोला पुजारी जी चढ़ाते हैं, आप सामग्री दे सकते हैं. घर की छोटी मूर्ति पर ऐसे चढ़ाएँ:
- सामग्री: नारंगी सिंदूर, चमेली का तेल, चाँदी का वर्क, जनेऊ, लाल कपड़ा, फूल माला.
- मूर्ति को जल से धोकर साफ़ कपड़े से पोंछें.
- सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएँ.
- पैरों से शुरू करके ऊपर की ओर लेप लगाएँ, मन में राम नाम या "ॐ हं हनुमते नमः" बोलते रहें.
- ऊपर से चाँदी का वर्क लगाएँ, फिर जनेऊ, लाल कपड़ा और माला चढ़ाएँ.
तस्वीर पर चोला नहीं चढ़ता, वहाँ सिंदूर का तिलक काफ़ी है.
मंगलवार व्रत कथा
यह कथा घर घर में अलग अलग ढंग से सुनाई जाती है. यहाँ इसे अपने सीधे शब्दों में लिखा है.
एक गाँव में एक ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे. उनकी कोई संतान नहीं थी, इसलिए दोनों दुखी रहते थे. ब्राह्मण संतान की कामना से वन में जाकर हनुमान जी की पूजा करने लगा, और उसकी पत्नी घर पर हर मंगलवार का व्रत रखने लगी. वह मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर ही भोजन करती थी.
एक मंगलवार किसी कारण से वह भोग नहीं बना पाई. उसने सोचा कि अब अगले मंगलवार भोग लगाकर ही कुछ खाऊँगी. पूरे छह दिन वह भूखी प्यासी रही. अगले मंगलवार वह कमज़ोरी से बेहोश हो गई. उसकी इस भक्ति से हनुमान जी प्रसन्न हुए, उसे दर्शन दिए और एक सुंदर बालक का आशीर्वाद दिया. बालक मंगलवार को मिला था, इसलिए उसका नाम मंगल रखा गया.
जब ब्राह्मण लौटा और बालक को देखा, तो उसे पत्नी पर शक हुआ. एक दिन उसने मौक़ा देखकर बालक को कुएँ में डाल दिया. घर लौटा तो पत्नी ने पूछा, मंगल कहाँ है? तभी मंगल मुस्कुराता हुआ पीछे से आ गया. उसी रात हनुमान जी ने ब्राह्मण को सपने में बताया कि यह बालक मेरी कृपा से तुम्हारी पत्नी के व्रत का फल है. ब्राह्मण को अपनी भूल पर पछतावा हुआ और दोनों पति पत्नी मिलकर मंगलवार का व्रत करने लगे.
कथा का भाव यही है कि सच्ची श्रद्धा और धैर्य को हनुमान जी अनदेखा नहीं करते, और शक भक्ति का सबसे बड़ा दुश्मन है.
मंगलवार व्रत के नियम
- व्रत शुरू करना हो तो किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले मंगलवार से शुरू करें. ज़्यादातर लोग 21 मंगलवार का संकल्प लेते हैं.
- दिन में एक बार, शाम की पूजा के बाद, भोजन करें. नमक नहीं खाते. गेहूँ और गुड़ से बनी चीज़ें, जैसे चूरमा या गुड़ की रोटी, आम हैं.
- मांस, अंडा, शराब और तामसिक भोजन से दूर रहें.
- संकल्प पूरा होने पर उद्यापन करें: हनुमान जी को चोला, भोग, और 21 लोगों को भोजन या दान, जितना हो सके.
- सेहत ठीक न हो, गर्भावस्था हो या डायबिटीज़ हो तो भूखे न रहें. फल या हल्का भोजन लेकर व्रत रखें.
मंगलवार को क्या न करें
- मांस, अंडा और शराब न लें.
- बहुत घरों में मंगलवार को बाल और नाख़ून नहीं काटे जाते.
- झगड़ा, कड़वी बात और किसी का बुरा सोचने से बचें.
- पूजा दिखावे के लिए न करें. चुपचाप, मन से की गई पूजा ही असली है.
मंगलवार के आसान उपाय
लोग मंगलवार को ये छोटे छोटे काम करते हैं. ये परंपराएँ हैं, कोई जादू नहीं, और इनसे ज़्यादा ज़रूरी है अपनी मेहनत और सच्चाई:
- शाम को हनुमान मंदिर में चमेली के तेल का दीया जलाना.
- 11 बार हनुमान चालीसा या एक बार सुंदरकांड का पाठ.
- ग़रीब को लाल मसूर की दाल, गुड़, केले या बूंदी देना.
- बंदरों को गुड़-चना खिलाना, ध्यान से और उन्हें परेशान किए बिना.
ज्येष्ठ महीने के मंगलवार, जिन्हें बड़ा मंगल कहते हैं, और हनुमान जयंती पर यह पूजा और भी धूम से होती है. जयपुर में हम संकटमोचन हनुमान मंदिर, बंध की घाटी जाते हैं, जहाँ मंगलवार शाम को लंबी लाइन लगती है.
Questions people ask
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कैसे करें?
नहाकर साफ़ कपड़े पहनें, हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी या चमेली के तेल का दीया जलाएँ. सिंदूर, लाल फूल और गुड़-चने या बूंदी का भोग चढ़ाएँ. फिर हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक और बजरंग बाण पढ़ें और अंत में आरती करें. पूरी पूजा 20 से 25 मिनट में हो जाती है.
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा क्यों होती है?
मान्यता है कि हनुमान जी का जन्म मंगलवार को हुआ था, इसलिए यह दिन उनका माना जाता है. मंगल ग्रह के दोष के लिए भी लोग मंगलवार को हनुमान जी की पूजा करते हैं.
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा कब करनी चाहिए?
सुबह नहाने के बाद या शाम को संध्या के समय. ज़्यादातर मंदिरों में शाम की आरती के समय सबसे ज़्यादा भीड़ होती है. घर पर जो समय रोज़ निभा सकें, वही सबसे अच्छा है.
मंगलवार को हनुमान जी को क्या चढ़ाएँ?
सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर, लाल फूल, तुलसी, बूंदी या बेसन के लड्डू, गुड़ और भुने चने, पान का बीड़ा और केले. सबसे ज़रूरी है साफ़ मन.
Hanuman ji ko chola kaise chadhaye?
Chameli ke tel mein sindoor milakar lep banaiye. Murti ko jal se saaf karke, paon se shuru karke upar ki taraf lep lagaiye, phir chandi ka vark lagaiye. Saath mein janeu, laal kapda aur phool chadhaiye. Ghar ki chhoti murti par chola na ho to sirf sindoor ka tilak bhi kaafi hai. Mandir mein chola pujari ji se chadhwana achha rehta hai.
मंगलवार व्रत कैसे रखें?
सुबह नहाकर व्रत का संकल्प लें, हनुमान जी की पूजा करें और मंगलवार व्रत कथा पढ़ें या सुनें. दिन में एक बार, शाम की पूजा के बाद, बिना नमक का भोजन करें, जैसे गेहूँ और गुड़ से बनी चीज़ें. बहुत लोग लगातार 21 मंगलवार का व्रत रखते हैं.
Mangalwar ko kya nahi karna chahiye?
Paramparaon ke hisaab se is din maans, anda aur sharab se bacha jaata hai. Bahut se ghar mangalwar ko baal aur naakhun nahi kaatte. Kisi se jhagda na karein aur kisi ka bura na sochein. Vrat ho to namak nahi khaate.
मंगलवार व्रत के नुकसान क्या हैं?
व्रत से कोई नुक़सान नहीं होता, पर सेहत का ध्यान रखें. डायबिटीज़, गर्भावस्था, बुढ़ापे या किसी बीमारी में बिना खाए व्रत न रखें. फल या एक बार हल्का भोजन लेकर भी व्रत किया जा सकता है. पूजा भाव से होती है, भूखे रहने से नहीं.
मंगलवार को हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ना चाहिए?
एक बार भी पूरे मन से काफ़ी है. मंगलवार को बहुत लोग 3, 7 या 11 बार पढ़ते हैं. बाक़ी नियम पढ़ने के नियम वाले पेज पर हैं.
Mangalwar ko kya daan karna chahiye?
Laal masoor ki daal, gud, laal kapda, kele ya boondi garib ko dena achha maana jaata hai. Mandir mein tel aur sindoor bhi chadhate hain. Daan apni shakti ke hisaab se, bina dikhawe ke karein.
बड़ा मंगल क्या है?
ज्येष्ठ महीने के सभी मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहते हैं. उत्तर भारत में, ख़ासकर लखनऊ में, इन दिनों जगह जगह भंडारे होते हैं और हनुमान जी की विशेष पूजा होती है.
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One small thing about me. I am not a pandit or a big scholar, just an ordinary bhakt of Bajrang Bali from Jaipur. I made this page as seva and I check the text with care. The Hanuman Ashtak here matches the Gita Press book Bhaktaraj Hanuman word for word. Still, if you notice any mistake anywhere, please write to me on the contact page and I will correct it.Last checked and updated: 24 October 2026
Saurabh Satyaram, Jaipur
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