Hanuman Ashtak aur Chalisa ke niyam
हनुमान अष्टक और चालीसा पढ़ने के नियम
लोग सबसे ज़्यादा यही पूछते हैं: कब पढ़ें, कितनी बार पढ़ें, और क्या रात को या पीरियड्स में पढ़ सकते हैं. यहाँ इनका सीधा जवाब है, जैसा हमारे घरों में होता आया है. एक बात पहले ही: ये नियम श्रद्धा को सँभालने के लिए हैं, डराने के लिए नहीं. हनुमान जी भाव देखते हैं.
एक नज़र में
- कब: सुबह नहाकर या शाम को दीया जलाकर. मंगलवार और शनिवार ख़ास दिन.
- क्रम: पहले हनुमान चालीसा, फिर हनुमान अष्टक, फिर बजरंग बाण, अंत में आरती.
- कितनी बार: रोज़ एक बार काफ़ी है. संकल्प में 7, 11, 21, 100 या 108 बार.
- रात को: पढ़ सकते हैं, कोई मनाही नहीं.
- सबसे बड़ा नियम: मन साफ़ रखें और पाठ जल्दबाज़ी में न करें.
हनुमान अष्टक और चालीसा कब पढ़ना चाहिए
कोई भी दिन और कोई भी समय ठीक है. फिर भी घरों में जो चलन है, वह यह है:
- सुबह: नहाने के बाद, सूर्योदय के आसपास. मन शांत रहता है और दिन की शुरुआत हनुमान जी के नाम से होती है.
- शाम: संध्या को दीया जलाकर. ज़्यादातर परिवार चालीसा और अष्टक इसी समय पढ़ते हैं.
- रात को सोने से पहले: डर लगे, बुरे सपने आएँ या नींद न आए, तो बहुत लोग चालीसा पढ़कर या सुनकर सोते हैं.
- मंगलवार और शनिवार: हनुमान जी के दिन. इन दिनों पाठ के साथ सिंदूर, चमेली का तेल और बूंदी या गुड़-चने का भोग चढ़ाते हैं.
हनुमान अष्टक हमेशा चालीसा के बाद पढ़ा जाता है, क्योंकि चालीसा में हनुमान जी की स्तुति है और अष्टक में संकट दूर करने की प्रार्थना. पूरा क्रम चालीसा, अष्टक और बजरंग बाण एक साथ वाले पेज पर है.
कितनी बार पढ़ना चाहिए
रोज़ एक बार, ध्यान से, सबसे अच्छा है. बाक़ी गिनतियाँ किसी ख़ास मनोकामना या संकट के समय के संकल्प हैं.
| कितनी बार | कब करते हैं | ध्यान रखें |
|---|---|---|
| 1 बार | रोज़ का पाठ | चालीसा के बाद अष्टक. लगभग 15 मिनट. |
| 3 या 7 बार | मंगलवार, शनिवार, या मन अशांत हो | 7 बार चालीसा का पाठ बहुत घरों में संकट के समय होता है. |
| 11 बार | मंगलवार का संकल्प, किसी काम की शुरुआत | एक ही बैठक में, बीच में बात न करें. |
| 21 बार | बड़ी परेशानी, लंबी बीमारी | दो बैठकों में बाँट सकते हैं, सुबह और शाम. |
| 100 बार (शतपाठ) | हनुमान जयंती, विशेष अनुष्ठान | कई लोग मिलकर करते हैं. 100 बार चालीसा पढ़ने का पूरा तरीका. |
| 108 बार | सबसे बड़ा संकल्प | माला से गिनें. कई दिनों में भी पूरा कर सकते हैं. |
40 दिन तक रोज़ पाठ का संकल्प भी बहुत लोग लेते हैं. उसके नियम और बीच में टूट जाए तो क्या करें, यह 40 दिन हनुमान चालीसा वाले पेज पर है.
पाठ की आसान विधि
- नहाकर साफ़ कपड़े पहनें. लाल या केसरिया हो तो अच्छा.
- हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने बैठें. साथ में राम जी की तस्वीर हो तो और अच्छा.
- घी या चमेली के तेल का दीया जलाएँ.
- पहले राम जी का नाम लें, फिर हनुमान चालीसा, फिर संकटमोचन हनुमान अष्टक.
- अंत में हनुमान आरती और भोग. जय श्री राम बोलकर उठें.
क्या न करें
- पाठ के दिन मांस, अंडा और शराब से बचें. हनुमान जी ब्रह्मचारी हैं और उनकी पूजा सात्विक रखी जाती है.
- पाठ जल्दबाज़ी में या फ़ोन देखते हुए न करें. कम पढ़ें, पर ध्यान से.
- किसी को नुक़सान पहुँचाने की मनोकामना से पाठ न करें.
- पाठ को डर का कारण न बनाएँ. कोई दिन छूट जाए तो अगले दिन फिर शुरू करें, कोई दोष नहीं लगता.
महिलाएँ, पीरियड्स और सूतक
महिलाएँ हनुमान चालीसा और अष्टक पढ़ सकती हैं, इसमें कोई रोक नहीं है. पीरियड्स के दिनों में कई घर मूर्ति या पुस्तक नहीं छूते, पर मन में पाठ करना या सुनना ठीक मानते हैं. सूतक में भी यही चलन है. यह हर परिवार की अपनी मान्यता है, अपने घर के बड़ों की बात मानिए. इस पर पूरी बात क्या महिलाएँ हनुमान चालीसा पढ़ सकती हैं में है.
पढ़ने के फ़ायदे क्या हैं, यह हनुमान अष्टक के फ़ायदे पेज पर है.
Questions people ask
हनुमान चालीसा कितनी बार पढ़ना चाहिए?
रोज़ कम से कम एक बार, पूरे मन से. यही सबसे सही नियम है. मंगलवार और शनिवार को लोग 3, 7 या 11 बार पढ़ते हैं. किसी बड़े संकल्प में 21, 100 या 108 बार का पाठ होता है. गिनती से ज़्यादा ज़रूरी यह है कि मन पाठ में रहे.
हनुमान अष्टक कब पढ़ना चाहिए?
हनुमान चालीसा के ठीक बाद. सुबह नहाकर या शाम को दीया जलाकर, कभी भी. मंगलवार और शनिवार ख़ास दिन हैं, और जब कोई संकट या डर हो तब भी लोग इसे पढ़ते हैं.
Hanuman Ashtak kitni baar padhna chahiye?
Roz ek baar kaafi hai. Mangalwar ko kuch log 3 ya 7 baar padhte hain, aur kisi bade sankat mein 11 baar ka sankalp lete hain. Ek baar dhyan se padhna, das baar jaldi mein padhne se achha hai.
Can we read Hanuman Ashtak and Chalisa daily?
Yes. Most families read the Hanuman Chalisa and then the Sankat Mochan Hanuman Ashtak every day. There is no rule against daily paath. Doing it at the same time each day makes it a habit.
क्या हनुमान चालीसा रात को पढ़ सकते हैं?
हाँ. शाम को दीया जलाने के बाद या रात को सोने से पहले पढ़ना बहुत घरों में होता है, ख़ासकर जब डर लगे या नींद न आए. रात के लिए कोई मनाही नहीं है.
Periods mein Hanuman Chalisa padh sakte hain?
Yeh har parivaar ki apni maanyata hai. Kai ghar is samay murti ya pustak ko chhoone se bachte hain, par man mein paath karna ya sunna theek maante hain. Hanuman ji bhaav dekhte hain. Is par poori baat yahan hai: kya mahilayen Hanuman Chalisa padh sakti hain.
Can we read Hanuman Chalisa after eating non veg or egg?
Traditionally, people avoid non veg, eggs and alcohol on the day they do Hanuman ji's paath, because he is a brahmachari and his puja is kept sattvik. Many skip non veg on Tuesday and Saturday for this reason. If you have eaten, wash your hands and mouth and do the paath later, or simply listen.
Kya bina nahaye Hanuman Chalisa padh sakte hain?
Puja ke liye nahakar baithna achha maana jaata hai. Par safar mein, beemaari mein ya kisi mushkil ghadi mein haath-munh dhokar ya man mein paath kar sakte hain. Sankat ke samay Hanuman ji ko yaad karne ke liye koi rok nahi hai.
Can we read Hanuman Chalisa on the bed?
It is better to sit on a clean mat or chair. If you are ill, old or cannot sit, reading or listening while lying down is fine. Reading it before sleep is also common.
Sutak mein Hanuman Chalisa padh sakte hain?
Sutak (janm ya maran ke baad ke din) mein ghar ki puja aur murti chhoona aam taur par roka jaata hai. Par man mein naam jap ya paath ko bahut log theek maante hain. Apne ghar ke bado ki baat maniye.
Hanuman Chalisa kitni baar sunna chahiye?
Sunne ki koi ginti nahi hai. Jab man ho, sun sakte hain, raat ko bhi. Agar padh nahi sakte to sunna bhi paath jaisa hi hai, bas saath mein man se bolte rahiye.
हनुमान अष्टक किसने लिखा?
गोस्वामी तुलसीदास जी ने, अवधी में. उन्होंने ही हनुमान चालीसा और श्रीरामचरितमानस लिखे हैं.
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One small thing about me. I am not a pandit or a big scholar, just an ordinary bhakt of Bajrang Bali from Jaipur. I made this page as seva and I check the text with care. The Hanuman Ashtak here matches the Gita Press book Bhaktaraj Hanuman word for word. Still, if you notice any mistake anywhere, please write to me on the contact page and I will correct it.Last checked and updated: 24 October 2026
Saurabh Satyaram, Jaipur
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