॥ जय श्री राम ॥  •  Jai Bajrang Bali
Hanuman AshtakSankat Mochan · संकटमोचन

The full paath, in order

Hanuman Chalisa, Ashtak aur Bajrang Baan

॥ चालीसा, अष्टक, बजरंग बाण ॥

Many of us read these together: first the Hanuman Chalisa, then the Sankat Mochan Hanuman Ashtak, then the Bajrang Baan, and the Hanuman Aarti at the end. Here is the whole paath likhit (written) in one place, in that order, with one PDF for all of it. पूरा पाठ लगभग 20 से 25 मिनट में होता है.

Hanuman Ashtak aur Bajrang Baan mein kya antar hai?

They are often read one after the other, but they are quite different paaths.

Hanuman AshtakBajrang Baan
Written byGoswami TulsidasComes in the Tulsidas tradition
Size8 chhand and 1 dohaDoha, chaupai and a closing doha
BhaavCalm. Remembers 8 times Hanuman ji removed a sankat, and asks the same for usUrgent. A direct pukar for protection, with beej mantras
WhenDaily, right after the ChalisaTuesday and Saturday, or in fear and heavy trouble
TimeAbout 5 minutesAbout 5 to 7 minutes

1. Hanuman Chalisa

Chalisa meaning

॥ दोहा ॥

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥

॥ चौपाई ॥

1
जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
2
राम दूत अतुलित बल धामा।
अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
3
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
4
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥
5
हाथ बज्र और ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
6
संकर सुवन केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन॥
7
बिद्यावान गुनी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
8
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लषन सीता मन बसिया॥
9
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
10
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥
11
लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
12
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
13
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
14
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
नारद सारद सहित अहीसा॥
15
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
16
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
17
तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेस्वर भए सब जग जाना॥
18
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥
19
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
20
दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
21
राम दुआरे तुम रखवारे।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
22
सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना॥
23
आपन तेज सम्हारो आपै।
तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
24
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥
25
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
26
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
27
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥
28
और मनोरथ जो कोइ लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
29
चारों जुग परताप तुम्हारा।
है परसिद्ध जगत उजियारा॥
30
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
31
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
32
राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥
33
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
34
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
35
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
36
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
37
जै जै जै हनुमान गोसाईं।
कृपा करहु गुरु देव की नाईं॥
38
जो सत बार पाठ कर कोई।
छूटहि बंदि महा सुख होई॥
39
जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
40
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥

॥ दोहा ॥

पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप।
राम लषन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥

2. Sankat Mochan Hanuman Ashtak

1

बाल समय रबि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अँधियारो।
ताहि सों त्रास भयो जग को यह संकट काहु सों जात न टारो॥
देवन आनि करी बिनती तब छाँड़ि दियो रबि कष्ट निवारो।
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

2

बालि की त्रास कपीस बसै गिरि जात महाप्रभु पंथ निहारो।
चौंकि महा मुनि साप दियो तब चाहिय कौन बिचार बिचारो॥
कै द्विज रूप लिवाय महाप्रभु सो तुम दास के सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

3

अंगद के सँग लेन गये सिय खोज कपीस यह बैन उचारो।
जीवत ना बचिहौ हम सो जु बिना सुधि लाए इहाँ पगु धारो॥
हेरि थके तट सिंधु सबै तब लाय सिया-सुधि प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

4

रावन त्रास दई सिय को सब राक्षसि सों कहि सोक निवारो।
ताहि समय हनुमान महाप्रभु जाय महा रजनीचर मारो॥
चाहत सीय असोक सों आगि सु दै प्रभु मुद्रिका सोक निवारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

5

बान लग्यो उर लछिमन के तब प्रान तजे सुत रावन मारो।
लै गृह बैद्य सुषेन समेत तबै गिरि द्रोन सु बीर उपारो॥
आनि सजीवन हाथ दई तब लछिमन के तुम प्रान उबारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

6

रावन जुद्ध अजान कियो तब नाग कि फाँस सबै सिर डारो।
श्रीरघुनाथ समेत सबै दल मोह भयो यह संकट भारो॥
आनि खगेस तबै हनुमान जु बंधन काटि सुत्रास निवारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

7

बंधु समेत जबै अहिरावन लै रघुनाथ पताल सिधारो।
देबिहिं पूजि भली बिधि सों बलि देउ सबै मिलि मंत्र बिचारो॥
जाय सहाय भयो तब ही अहिरावन सैन्य समेत सँहारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

8

काज किये बड़ देवन के तुम बीर महाप्रभु देखि बिचारो।
कौन सो संकट मोर गरीब को जो तुमसों नहिं जात है टारो॥
बेगि हरो हनुमान महाप्रभु जो कछु संकट होय हमारो॥
को नहिं जानत है जगमें कपि संकटमोचन नाम तिहारो॥

Doha

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लँगूर।
बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर॥

3. Bajrang Baan

॥ दोहा ॥

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

॥ चौपाई ॥

1
जय हनुमंत संत हितकारी।
सुन लीजै प्रभु अरज हमारी॥
2
जन के काज बिलंब न कीजै।
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
3
जैसे कूदि सिंधु महिपारा।
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
4
आगे जाय लंकिनी रोका।
मारेहु लात गई सुरलोका॥
5
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा।
सीता निरखि परमपद लीन्हा॥
6
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा।
अति आतुर जमकातर तोरा॥
7
अक्षय कुमार मारि संहारा।
लूम लपेटि लंक को जारा॥
8
लाह समान लंक जरि गई।
जय जय धुनि सुरपुर नभ भई॥
9
अब बिलंब केहि कारन स्वामी।
कृपा करहु उर अन्तर्यामी॥
10
जय जय लखन प्राण के दाता।
आतुर ह्वै दुःख करहु निपाता॥
11
जै गिरिधर जै जै सुख सागर।
सुर-समूह-समरथ भटनागर॥
12
ॐ हनु हनु हनु हनुमंत हठीले।
बैरिहि मारु बज्र की कीले॥
13
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो।
महाराज प्रभु दास उबारो॥
14
ॐ कार हुंकार महाप्रभु धावो।
बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
15
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमंत कपीशा।
ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
16
सत्य होहु हरि शपथ पायके।
राम दूत धरु मारु जाय के॥
17
जय जय जय हनुमंत अगाधा।
दुःख पावत जन केहि अपराधा॥
18
पूजा जप तप नेम अचारा।
नहिं जानत हौं दास तुम्हारा॥
19
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं।
तुम्हरे बल हम डरपत नाहीं॥
20
पांय परौं कर जोरि मनावौं।
येहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
21
जय अंजनि कुमार बलवंता।
शंकर सुवन वीर हनुमंता॥
22
बदन कराल काल कुल घालक।
राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
23
भूत प्रेत पिशाच निशाचर।
अग्नि बेताल काल मारी मर॥
24
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की।
राखु नाथ मरजाद नाम की॥
25
जनकसुता हरि दास कहावो।
ताकी शपथ बिलंब न लावो॥
26
जै जै जै धुनि होत अकासा।
सुमिरत होय दुसह दुःख नाशा॥
27
चरण शरण कर जोरि मनावौं।
यहि अवसर अब केहि गोहरावौं॥
28
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई।
पाँय परौं कर जोरि मनाई॥
29
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता।
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता॥
30
ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल।
ॐ सं सं सहमि पराने खल दल॥
31
अपने जन को तुरत उबारो।
सुमिरत होय आनंद हमरो॥
32
यह बजरंग बाण जेहि मारै।
ताहि कहो फिरि कौन उबारै॥
33
पाठ करै बजरंग बाण की।
हनुमत रक्षा करै प्रान की॥
34
यह बजरंग बाण जो जापै।
ताते भूत-प्रेत सब कापैं॥
35
धूप देय जो जपै हमेशा।
ताके तन नहिं रहै कलेशा॥

॥ दोहा ॥

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान॥

4. Hanuman Aarti

॥ ध्यान ॥

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथ मुख्यं, श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जाके बल से गिरवर काँपे।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
दे वीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाये॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
लंका जारि असुर संहारे।
सियाराम जी के काज सँवारे॥
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
लाये संजिवन प्राण उबारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
पैठि पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाईं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
जो हनुमानजी की आरती गावे।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे॥
लंक विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई॥
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥
Sampoorna paath PDFAll four paaths together. Print it once and keep it.DownloadAll PDFs

Questions people ask

In what order should I read the Hanuman Chalisa, Ashtak and Bajrang Baan?

The usual order in most homes is Hanuman Chalisa first, then the Sankat Mochan Hanuman Ashtak, then the Bajrang Baan, and the Hanuman Aarti at the end. This page gives them in exactly that order.

How long does the full paath take?

About 20 to 25 minutes at a normal pace: around 8 to 10 minutes for the Chalisa, 5 for the Ashtak, 5 to 7 for the Bajrang Baan and 3 for the Aarti.

Hanuman Ashtak aur Bajrang Baan mein kya antar hai?

Ashtak shaant bhaav ka paath hai. Iske aath chhand yaad dilate hain ki Hanuman ji ne Ramayan mein kab kab sankat door kiya, aur phir apne liye wahi maangte hain. Bajrang Baan ek turant pukar hai, jo darr ya bhaari sankat ke samay padhi jaati hai. Roz ke liye Chalisa aur Ashtak kaafi hain, Bajrang Baan mangalwar aur shanivar ko jodiye.

Can I read only the Ashtak and the Bajrang Baan?

Yes. There is no rule that all must be read together. But most people start with the Chalisa because it praises Hanuman ji first, and then ask for help with the Ashtak and the Bajrang Baan.

Is there one PDF with all of them?

Yes, the sampoorna paath PDF has the Hanuman Chalisa, Hanuman Ashtak, Bajrang Baan and Hanuman Aarti together, in order. It is free to download and print.

हनुमान चालीसा, हनुमान अष्टक और बजरंग बाण कब पढ़ें?

रोज़ सुबह या शाम हनुमान चालीसा और हनुमान अष्टक पढ़ सकते हैं. मंगलवार और शनिवार को बजरंग बाण और आरती भी जोड़िए. हनुमान जयंती पर यह पूरा पाठ विशेष माना जाता है.

Read next

Saurabh Satyaram, a Hanuman devotee from Jaipur

The Hanuman Chalisa and the Hanuman Ashtak here match the Gita Press book Bhaktaraj Hanuman word for word. The Bajrang Baan and Aarti are taken from trusted sources and checked with care. Editions differ a little in wording, so if your family gutka has a slightly different line, please go with yours.

Saurabh Satyaram, Jaipur

Share this paath

Send it to family on WhatsApp. Sharing a paath is a small seva too.

Join Hanuman Bhakti Yatra

Paath reminders for Tuesday and Saturday, festival dates like Hanuman Jayanti, and every new PDF, shared first with our family on Telegram and Facebook. Free, and you can leave any time.